पौरुषं धाम शब्दों को विभिन्न आचार्यों द्वारा समझाया गया है। श्री वीरराघव आचार्य कहते हैं कि ये शब्द सर्वोच्च देवता के तेजस्व को संदर्भित करते हैं, विजयध्वज कहते हैं कि वे विष्णु-तेजास को दर्शाते हैं, और शुकदेव कहते हैं भगवत-स्वरूप। वैष्णव-तोषणी कहते हैं कि ये शब्द सर्वोच्च भगवान के तेज के प्रभाव को दर्शाते हैं, और विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कहते हैं कि वे सर्वोच्च देवता के प्रकट होने का संकेत देते हैं।
