श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 2: देवताओं द्वारा गर्भस्थ कृष्ण की स्तुति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.2.14 
सन्दिष्टैवं भगवता तथेत्योमिति तद्वच: ।
प्रतिगृह्य परिक्रम्य गां गता तत् तथाकरोत् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान के आदेशानुसार योगमाया ने बिना देरी उसे स्वीकार कर लिया। उसने वैदिक मंत्र ॐ के साथ अभिपुष्टि की कि वह जो कहेंगे वैसा ही करेगी। इसके बाद उसने भगवान की परिक्रमा की और नन्दगोकुल नामक स्थान के लिए प्रस्थान किया। वहाँ उसने ठीक वैसा ही किया जैसा कि उसे आदेश मिला था।
 
भगवान के आदेशानुसार योगमाया ने बिना देरी उसे स्वीकार कर लिया। उसने वैदिक मंत्र ॐ के साथ अभिपुष्टि की कि वह जो कहेंगे वैसा ही करेगी। इसके बाद उसने भगवान की परिक्रमा की और नन्दगोकुल नामक स्थान के लिए प्रस्थान किया। वहाँ उसने ठीक वैसा ही किया जैसा कि उसे आदेश मिला था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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