श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 2: देवताओं द्वारा गर्भस्थ कृष्ण की स्तुति  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  10.2.1-2 
श्रीशुक उवाच
प्रलम्बबकचाणूरतृणावर्तमहाशनै: ।
मुष्टिकारिष्टद्विविदपूतनाकेशीधेनुकै: ॥ १ ॥
अन्यैश्चासुरभूपालैर्बाणभौमादिभिर्युत: ।
यदूनां कदनं चक्रे बली मागधसंश्रय: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: मगधराज जरासंध के संरक्षण में शक्तिशाली कंस ने यदुवंशी राजाओं को सताना शुरू कर दिया। इसमें उसे प्रलम्ब, बक, चाणूर, तृणावर्त, अघासुर, मुष्टिक, अरिष्ट, द्विविद, पूतना, केशी, धेनुक, बाणासुर, नरकासुर और पृथ्वी के अनेक अन्य असुर राजाओं का सहयोग प्राप्त था।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: मगधराज जरासंध के संरक्षण में शक्तिशाली कंस ने यदुवंशी राजाओं को सताना शुरू कर दिया। इसमें उसे प्रलम्ब, बक, चाणूर, तृणावर्त, अघासुर, मुष्टिक, अरिष्ट, द्विविद, पूतना, केशी, धेनुक, बाणासुर, नरकासुर और पृथ्वी के अनेक अन्य असुर राजाओं का सहयोग प्राप्त था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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