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bhagavat 10.19.2: बड़े जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की ओर बढ़ते हुए, बकरियाँ, गायें और भैंसें अंत में नुकीले नरकटों से भरे इलाके में घुस गईं। पास के जंगल की आग की गर्मी से उन्हें प्यास लग गई और वे पीड़ा से कराहने लगीं।   |   bhagavat अध्याय 10.19: दावानल पान   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 19: दावानल पान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.19.2 
अजा गावो महिष्यश्च निर्विशन्त्यो वनाद् वनम् ।
ईषीकाटवीं निर्विविशु: क्रन्दन्त्यो दावतर्षिता: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
बड़े जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से की ओर बढ़ते हुए, बकरियाँ, गायें और भैंसें अंत में नुकीले नरकटों से भरे इलाके में घुस गईं। पास के जंगल की आग की गर्मी से उन्हें प्यास लग गई और वे पीड़ा से कराहने लगीं।
 
Goats, cows and buffaloes, moving from one part of the vast forest to another, finally entered an area covered with Munj. They felt thirsty due to the heat of the fire in the nearby forest and started mooing in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)