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bhagavat 10.19.15: अब दोपहर ढल चुकी थी और भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम सहित गौओं को घर की ओर मोड़ दिया। अपनी बांसुरी को विशेष धुन में बजाते हुए कृष्ण गोप ग्राम में अपने ग्वाल मित्रों के संग लौट रहे थे और ग्वाल बाल उनके गुण गा रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.19: दावानल पान   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 19: दावानल पान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.19.15 
गा: सन्निवर्त्य सायाह्ने सहरामो जनार्दन: ।
वेणुं विरणयन् गोष्ठमगाद् गोपैरभिष्टुत: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
अब दोपहर ढल चुकी थी और भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम सहित गौओं को घर की ओर मोड़ दिया। अपनी बांसुरी को विशेष धुन में बजाते हुए कृष्ण गोप ग्राम में अपने ग्वाल मित्रों के संग लौट रहे थे और ग्वाल बाल उनके गुण गा रहे थे।
 
It was now late afternoon and Lord Krishna, along with Balarama, turned the cows towards home. Krishna returned to Gopagram with his cowherd friends, playing his flute in a unique manner and the cowherd boys were singing His praises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)