श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.18.4 
यत्र निर्झरनिर्ह्रादनिवृत्तस्वनझिल्लिकम् ।
शश्वत्तच्छीकरर्जीषद्रुममण्डलमण्डितम् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावन में झरनों के जोरदार शोर में झींगुरों की आवाज़ दब गई थी और उन झरनों की बौछार से निरंतर भीगे रहने वाले वृक्षों के समूहों ने पूरे इलाके को सुन्दर बना दिया था।
 
In Vrindavan the loud sound of the waterfalls masked the chirping of the crickets, and the entire area was adorned with groups of trees constantly moistened by the spray of those waterfalls.
तात्पर्य
यह और निम्नलिखित तीन श्लोक वर्णन करते हैं कि किस प्रकार वृन्दावन में गर्मियों के मौसम में भी वसंत ऋतु के लक्षण प्रकट हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)