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bhagavat 10.18.32: पापी प्रलम्बासुर के नाश होने के पश्चात देवता अत्यंत हर्षित हुए और उन्होंने बलराम जी पर पुष्पमालाएं बरसाईं। साथ ही, उनके महान कार्य की प्रशंसा भी की।   |   bhagavat अध्याय 10.18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.18.32 
पापे प्रलम्बे निहते देवा: परमनिर्वृता: ।
अभ्यवर्षन् बलं माल्यै: शशंसु: साधु साध्विति ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
पापी प्रलम्बासुर के नाश होने के पश्चात देवता अत्यंत हर्षित हुए और उन्होंने बलराम जी पर पुष्पमालाएं बरसाईं। साथ ही, उनके महान कार्य की प्रशंसा भी की।
 
" The gods were very pleased at the slaying of the sinner Pralambasura and they showered garlands of flowers on Balarama. They praised his noble deed.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत अठारहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)