Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.17.19: अपने खोए हुए पुत्र को पुनः पाकर परम भाग्यशाली माता यशोदा ने उन्हें अपनी गोद में ले लिया। वह साध्वी बार-बार उन्हें गले लगाती रहीं और उनके गालों पर आँसुओं की धारा बहने लगी। | bhagavat अध्याय 10.17: कालिय का इतिहास । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने खोए हुए पुत्र को पुनः पाकर परम भाग्यशाली माता यशोदा ने उन्हें अपनी गोद में ले लिया। वह साध्वी बार-बार उन्हें गले लगाती रहीं और उनके गालों पर आँसुओं की धारा बहने लगी।
Mother Yashoda, the most fortunate one, found her lost son again and took him in her lap. The nun cried profusely as she embraced him again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥