श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  10.16.61 
य एतत् संस्मरेन्मर्त्यस्तुभ्यं मदनुशासनम् ।
कीर्तयन्नुभयो: सन्ध्योर्न युष्मद् भयमाप्नुयात् ॥ ६१ ॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई नश्वर प्राणी मेरे आदेश को ध्यानपूर्वक याद रखता है -- वृंदावन छोड़कर सागर में चले जाना -- और प्रातः और संध्या के समय इस कथा को सुनाता है, तो वह कभी भी तुमसे नहीं डरेगा।
 
If someone remembers this order given by me to you (to leave Vrindavan and go to the sea) and reads this story in the morning and evening, he will never be afraid of you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)