Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.55: इसके बाद, कालिय को धीरे-धीरे अपनी जीवन शक्ति और इंद्रियों की क्रियाशीलता फिर से मिल गई। तब साँस लेना मुश्किल से लेते हुए, वह बेचारा सर्प विनम्रतापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण से बोला। | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद, कालिय को धीरे-धीरे अपनी जीवन शक्ति और इंद्रियों की क्रियाशीलता फिर से मिल गई। तब साँस लेना मुश्किल से लेते हुए, वह बेचारा सर्प विनम्रतापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण से बोला।
Gradually Kaliya regained his life force and the functioning of his senses. Then the poor serpent, breathing hard and painfully, humbly addressed Lord Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥