शास्त्रों के आधार, लेखक और परम स्रोत, इन्द्रिय तृप्ति को प्रोत्साहित करने वाले और भौतिक संसार के प्रति विरक्ति पैदा करने वाले वैदिक साहित्य में प्रकट होने वाले आपको हम बारंबार नमन करते हैं।
We repeatedly salute You, who is the basis of all evidence, the originator and ultimate source of the scriptures, who has revealed Yourself in the Vedic literature that encourages sense-gratification (the path of action) and generates detachment from the material world.
तात्पर्य
यदि हमारे पास ज्ञान एवं अनुभूतियों की क्षमता न होती, तो साक्ष्य को संचारित नहीं किया जा सकता और यदि हमारे पास साक्ष्य के विशेष तरीकों पर विश्वास करने की प्रवृत्ति न होती तो अनुनय नहीं किया जा सकता। ये सभी प्रक्रियाएँ - ज्ञान, अनुभूति, अनुनय और संचारण - सर्वोच्च प्रभु की विभिन्न शक्तियों के माध्यम से होती हैं। सर्वोच्च प्रभु कृष्ण स्वयं सबसे महान विद्वान और बौद्धिक प्राणी हैं। वे ब्रह्मा और नारद जैसे महान भक्तों के दिलों में दिव्य ग्रंथों को प्रकट करते हैं और इसके अतिरिक्त वेदांत ज्ञान के संकलक वेदव्यास के रूप में अवतार लेते हैं। विविध तरीकों से प्रभु विभिन्न प्रकार के धार्मिक ग्रंथों को उत्पन्न करते हैं जो धीरे-धीरे बद्ध आत्माओं को ईश्वर के राज्य में दोबारा प्रवेश के विभिन्न चरणों से ले जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥