श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.16.39 
नमस्तुभ्यं भगवते पुरुषाय महात्मने ।
भूतावासाय भूताय पराय परमात्मने ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन, हम आपको बार-बार प्रणाम करते हैं। आप परमात्मा के रूप में सभी जीवों के दिल में विराजमान हैं, फिर भी आप सर्वव्यापी हैं। आप सभी निर्मित भौतिक तत्वों के मूल आश्रय हैं, लेकिन आप उनकी रचना से पहले से मौजूद हैं। आप सभी चीजों का कारण हैं, लेकिन परमात्मा होने के नाते आप भौतिक कारण और प्रभाव से परे हैं।
 
हे भगवन, हम आपको बार-बार प्रणाम करते हैं। आप परमात्मा के रूप में सभी जीवों के दिल में विराजमान हैं, फिर भी आप सर्वव्यापी हैं। आप सभी निर्मित भौतिक तत्वों के मूल आश्रय हैं, लेकिन आप उनकी रचना से पहले से मौजूद हैं। आप सभी चीजों का कारण हैं, लेकिन परमात्मा होने के नाते आप भौतिक कारण और प्रभाव से परे हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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