Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.37: जिन लोगों ने आपके चरण कमलों की धूल प्राप्त कर ली है, वो कभी भी स्वर्ग के राज्य, सीमाहीन संप्रभुता, ब्रह्मा का पद या पृथ्वी पर राज करने की कामना नहीं करते। उन्हें योग की पूर्णताओं या मुक्ति में भी कोई आकर्षण नहीं रहता है। | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न नाकपृष्ठं न च सार्वभौमं
न पारमेष्ठ्यं न रसाधिपत्यम् ।
न योगसिद्धीरपुनर्भवं वा
वाञ्छन्ति यत्पादरज:प्रपन्ना: ॥ ३७ ॥
अनुवाद
जिन लोगों ने आपके चरण कमलों की धूल प्राप्त कर ली है, वो कभी भी स्वर्ग के राज्य, सीमाहीन संप्रभुता, ब्रह्मा का पद या पृथ्वी पर राज करने की कामना नहीं करते। उन्हें योग की पूर्णताओं या मुक्ति में भी कोई आकर्षण नहीं रहता है।
Those who have attained the dust of your feet want neither the kingdom of heaven, nor infinite supremacy, nor the position of Brahma, nor the kingdom of the earth. They have no interest even in the accomplishments of yoga or salvation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥