Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.32: अत्यंत व्याकुल मन से उन साध्वी स्त्रियों ने अपने बच्चों को अपने सामने रखा और फिर समस्त प्राणियों के स्वामी के आगे भूमि पर लेटकर साष्टांग प्रणाम किया। वे अपने पापी पति के लिए मोक्ष और परम शरणदाता भगवान की शरण चाहती थीं, इसलिए उन्होंने विनम्रता से हाथ जोड़कर उनके निकट पहुँच गईं। | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्यंत व्याकुल मन से उन साध्वी स्त्रियों ने अपने बच्चों को अपने सामने रखा और फिर समस्त प्राणियों के स्वामी के आगे भूमि पर लेटकर साष्टांग प्रणाम किया। वे अपने पापी पति के लिए मोक्ष और परम शरणदाता भगवान की शरण चाहती थीं, इसलिए उन्होंने विनम्रता से हाथ जोड़कर उनके निकट पहुँच गईं।
Those pious women, with very anxious minds, brought their children before them and then fell on the ground and prostrated themselves before the Lord of all beings. They wanted salvation for their sinful husbands and to seek refuge in the Supreme Protector of God, so they came to Him with folded hands humbly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥