Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.3: हे ब्राह्मण, अनंत भगवान स्वतंत्र रूप से अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं। वृन्दावन में उन्होंने ग्वाला के रूप में जो अद्वितीय और दिव्य लीलाएँ कीं, उन्हें सुनकर कौन तृप्त हो सकता है? | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण, अनंत भगवान स्वतंत्र रूप से अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं। वृन्दावन में उन्होंने ग्वाला के रूप में जो अद्वितीय और दिव्य लीलाएँ कीं, उन्हें सुनकर कौन तृप्त हो सकता है?
O Brahmin, the infinite Lord acts freely according to His will. Who can be satisfied by hearing about the nectar-like magnanimous acts He performed as a cowherd boy in Vrindavan?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥