Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.23: कुछ समय तक भगवान् सामान्य मनुष्यों की तरह साँप के फन में लेटे रहे। पर जब उन्हें पता चला कि उनके गोकुल गाँव की स्त्रियाँ, बच्चे और अन्य निवासी उनकी वजह से बहुत दुखी हैं, जो उनके जीवन का आधार और एकमात्र लक्ष्य थे, तब उन्होंने कालिय नाग के बंधन से तुरंत मुक्त होकर खड़े हो गए। | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुछ समय तक भगवान् सामान्य मनुष्यों की तरह साँप के फन में लेटे रहे। पर जब उन्हें पता चला कि उनके गोकुल गाँव की स्त्रियाँ, बच्चे और अन्य निवासी उनकी वजह से बहुत दुखी हैं, जो उनके जीवन का आधार और एकमात्र लक्ष्य थे, तब उन्होंने कालिय नाग के बंधन से तुरंत मुक्त होकर खड़े हो गए।
For some time the Lord remained within the coils of the serpent, imitating the behavior of a normal mortal. But when He realized that the women, children and other residents of His village Gokul were extremely distressed because of His love for Him, who was the sole support of their lives, He immediately got up from the coils of the Kaliya serpent.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥