श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.16.22 
कृष्णप्राणान्निर्विशतो नन्दादीन् वीक्ष्य तं ह्रदम् ।
प्रत्यषेधत् स भगवान् राम: कृष्णानुभाववित् ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात भगवान बलराम ने देखा कि कृष्ण को अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले नंद महाराज और बाकी गोप लोग सर्प सरोवर में प्रवेश करने जा रहे हैं। ईश्वर होने के नाते बलराम को कृष्ण की असली शक्ति का पूरा-पूरा ज्ञान था, इसलिए उन्होंने उन सभी को रोक दिया।
 
Thereafter Lord Balarama saw that Nanda Maharaja and the other cowherds, who had dedicated their lives to Krishna, were about to enter the serpent lake. As the Lord, Balarama had full knowledge of Krishna's real power and therefore He stopped them all.
तात्पर्य
श्रील सनातन गोस्वामी जी प्रभु बलराम जी के इस प्रकार के चमत्कार का वर्णन करते हैं कि उन्होंने कुछ गोपों को समझाया, कुछ को पकड़ लिया और कुछ पर अपनी मुस्कान मात्र से प्रभाव डाला जिससे बहुत व्याकुल होकर वे लोग प्रभु श्रीकृष्ण के लिए अपने प्राण त्यागने के लिए सर्पों के सरोवर में कूदने के लिए तैयार हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)