Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.16.20: जब युवतियों के मन सदैव अनंत भगवान श्रीकृष्ण में रम जाते थे, तभी उन्होंने देखा कि कालिय उन्हें अपने चंगुल में ले गया था, तो उन्हें उनकी मित्रता, मुस्कुराती हुई नज़र और उनके वचनों की याद आई। अत्यधिक शोक में आकर उन्हें पूरा ब्रह्मांड शून्य दिखाई पड़ने लगा। | bhagavat अध्याय 10.16: कृष्ण द्वारा कालिय नाग को प्रताडऩा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब युवतियों के मन सदैव अनंत भगवान श्रीकृष्ण में रम जाते थे, तभी उन्होंने देखा कि कालिय उन्हें अपने चंगुल में ले गया था, तो उन्हें उनकी मित्रता, मुस्कुराती हुई नज़र और उनके वचनों की याद आई। अत्यधिक शोक में आकर उन्हें पूरा ब्रह्मांड शून्य दिखाई पड़ने लगा।
When the young gopis, whose minds were always absorbed in the infinite Lord Krishna, saw Him in the clutches of Kaliya, they remembered His friendship, His smiling glances and His words. Being overwhelmed with grief, the entire universe appeared to them as empty.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥