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bhagavat 10.15.49-50: विषैले जल को छूते ही सभी गायें और चरवाहे भगवान की दैवी शक्ति से मूर्च्छित हो गये और बेजान होकर नदी के किनारे गिर पड़े। हे कुरु-वीर, उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर समस्त योगेश्वरों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण को अपने उन भक्तों पर दया आ गई जिनका उनके अतिरिक्त और कोई स्वामी नहीं था। अतः उन्होंने तुरंत ही अपनी अमृत तुल्य दृष्टि डालकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.15: धेनुकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  10.15.49-50 
विषाम्भस्तदुपस्पृश्य दैवोपहतचेतस: ।
निपेतुर्व्यसव: सर्वे सलिलान्ते कुरूद्वह ॥ ४९ ॥
वीक्ष्य तान् वै तथाभूतान् कृष्णो योगेश्वरेश्वर: ।
ईक्षयामृतवर्षिण्या स्वनाथान् समजीवयत् ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
विषैले जल को छूते ही सभी गायें और चरवाहे भगवान की दैवी शक्ति से मूर्च्छित हो गये और बेजान होकर नदी के किनारे गिर पड़े। हे कुरु-वीर, उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर समस्त योगेश्वरों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण को अपने उन भक्तों पर दया आ गई जिनका उनके अतिरिक्त और कोई स्वामी नहीं था। अतः उन्होंने तुरंत ही अपनी अमृत तुल्य दृष्टि डालकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।
 
As soon as they touched the poisonous water, all the cows and cowherd boys became unconscious by the divine power of the Lord and fell lifeless on the bank of the river. O brave Kuru warrior, seeing them in this condition, Lord Krishna, the Lord of all Yogeshwaras, felt pity for His devotees who had no other master than Him. Thus, He instantly revived them by the shower of His nectar-like glances.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)