श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  10.15.43 
पीत्वा मुकुन्दमुखसारघमक्षिभृङ्गै-
स्तापं जहुर्विरहजं व्रजयोषितोऽह्नि ।
तत्सत्कृतिं समधिगम्य विवेश गोष्ठं
सव्रीडहासविनयं यदपाङ्गमोक्षम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
वृंदावन की स्त्रियाँ अपने भौंरों के समान आँखों से मुकुंद के सुंदर चेहरे के मधु का पान करके उस कष्ट को मिटा लेती थी जो उन्हें दिन में उनके साथ बिछड़ने के कारण हुआ होता था। कृष्ण पर तिरछी नजर डालतीं तरुण स्त्रियां और उनकी लाज, हंसी और विनम्रता से पूर्ण चितवन को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए श्रीकृष्ण गोप-ग्राम में प्रवेश करते थे।
 
The women of Vrindavan drank the nectar of Mukunda's beautiful face with their bee-like eyes and thus got rid of the pain they had felt during the day's separation. The young women of Vrindavan cast sidelong glances at the Lord which were full of coyness, laughter and humility and Krishna took this glance as a proper respect and entered the Gopa village.
तात्पर्य
कृष्ण, ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व में, श्रील प्रभुपाद इस घटना का वर्णन इस प्रकार करते हैं: "वृंदावन में सभी गोपियाँ कृष्ण की अनुपस्थिति के कारण बहुत उदास रहीं। पूरे दिन वे जंगल में या उन्हें चरागाह में गायों को चराते हुए कृष्ण के बारे में सोच रही थीं। जब उन्होंने कृष्ण को लौटते देखा, उनकी सभी चिंताएं तुरंत दूर हो गईं, और वे उनके चेहरे की ओर उसी तरह देखने लगीं जैसे ड्रोन कमल के फूल के शहद पर मंडराते हैं। जब कृष्ण गाँव में प्रवेश करते थे, तो युवा गोपियाँ मुस्कुराती और हँसती थीं। कृष्ण, बाँसुरी बजाते हुए, गोपियों के सुंदर मुस्कुराते चेहरों का आनंद लेते थे।''

सर्वोच्च भगवान, श्री कृष्ण, रोमांटिक कौशल के सर्वोच्च स्वामी हैं, और इस प्रकार उन्होंने वृंदावन की युवा ग्वालबालों के साथ प्यार भरी भावनाओं का कुशलतापूर्वक आदान-प्रदान किया। जब एक पवित्र युवती प्रेम में होती है, तो वह अपने प्रिय को शर्म, उल्लास और समर्पण के साथ देखती है। जब प्रिय उसकी प्रेम भेंट को प्राप्त करके उसकी नज़र को स्वीकार करके संतुष्ट हो जाता है, तो प्रेमी युवती का दिल खुशी से भर जाता है। ये वही रोमांटिक आदान-प्रदान थे जो सुंदर युवा कृष्ण और वृंदावन की प्रेमी ग्वालबालों के बीच हो रहे थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)