श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.15.40 
अथ तालफलान्यादन्मनुष्या गतसाध्वसा: ।
तृणं च पशवश्चेरुर्हतधेनुककानने ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
धेनुकासुर के वध के बाद अब लोग निडर होकर उस वन में जा सकते थे जहाँ उसका वध हुआ था। वे बिना किसी डर के ताड़ के पेड़ों के फल खाने लगे थे। अब गायें भी वहाँ पर स्वतंत्रता से चर सकती थीं।
 
People started going freely to the forest where Dhenukasur was killed and started eating the fruits of the palm trees without any fear. Now cows also started grazing grass there freely.
तात्पर्य
आचार्यों के अनुसार, पुलिंदा जैसों जैसे निम्न वर्ग के लोग खजूर के फल खाते थे, किंतु कृष्ण के ग्वाला बाल-सखा उन्हें अवांछनीय समझते थे, क्योंकि ये गधों के खून से रंगे होते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)