श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  10.15.39 
तयोस्तत् सुमहत् कर्म निशम्य विबुधादय: ।
मुमुचु: पुष्पवर्षाणि चक्रुर्वाद्यानि तुष्टुवु: ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
दोनों भाइयों की इस अद्भुत लीला को सुनकर देवताओं और अन्य उच्च प्राणियों ने फूलों की वर्षा की और उनकी स्तुति में गीत गाए और प्रार्थनाएँ कीं।
 
Hearing of this beautiful feat (leela) of the two brothers, the gods and other higher beings showered flowers and sang songs and hymns in their praise.
तात्पर्य
श्रील सनातन गोस्वामी जी भगवान की कृपा की व्याख्या इस प्रकार करते हुए कहते हैं कि कृष्ण और बलराम जी ने तड़ाग वन में अत्यंत शक्तिशाली खर राक्षस और दानवों का अत्यंत सहज और अपूर्व वेग से वध किया जिसे देखकर देवता, महर्षि आदि सभी आश्चर्यचकित और उल्लसित हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)