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bhagavat 10.15.34: बलराम जी द्वारा इस गर्दभ असुर के शरीर को सबसे ऊँचे ताड़ के पेड़ पर फेंकने से सारे पेड़ काँपने लगे और एक-दूसरे से टकराने लगे जैसे की तेज आंधी से हिल रहे हों।   |   bhagavat अध्याय 10.15: धेनुकासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.15.34 
बलस्य लीलयोत्सृष्टखरदेहहताहता: ।
तालाश्चकम्पिरे सर्वे महावातेरिता इव ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
बलराम जी द्वारा इस गर्दभ असुर के शरीर को सबसे ऊँचे ताड़ के पेड़ पर फेंकने से सारे पेड़ काँपने लगे और एक-दूसरे से टकराने लगे जैसे की तेज आंधी से हिल रहे हों।
 
Due to the act of Balarama throwing the body of the donkey demon on top of the tallest palm tree, all the trees began to creak and collide with each other as if they were shaken by a strong storm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)