श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.15.33 
तेनाहतो महातालो वेपमानो बृहच्छिरा: ।
पार्श्वस्थं कम्पयन् भग्न: स चान्यं सोऽपि चापरम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
बलराम जी ने धेनुकासुर के मृत शरीर को जंगल के सबसे ऊँचे ताड़ पर फेंक दिया, और जब मृत दानव वृक्ष की चोटी पर गिरा, तो वृक्ष हिलने लगा। विशाल ताड़ के वृक्ष से पास का एक अन्य वृक्ष भी हिलने लगा और राक्षस के भार के कारण टूट गया। से उससे निकट खड़ा वृक्ष भी इसी तरह से हिलने-डुलने लगा और टूट गया। इस तरह से एक-एक करके जंगल के कई वृक्ष हिलते-डुलते टूट गए।
 
बलराम जी ने धेनुकासुर के मृत शरीर को जंगल के सबसे ऊँचे ताड़ पर फेंक दिया, और जब मृत दानव वृक्ष की चोटी पर गिरा, तो वृक्ष हिलने लगा। विशाल ताड़ के वृक्ष से पास का एक अन्य वृक्ष भी हिलने लगा और राक्षस के भार के कारण टूट गया। से उससे निकट खड़ा वृक्ष भी इसी तरह से हिलने-डुलने लगा और टूट गया। इस तरह से एक-एक करके जंगल के कई वृक्ष हिलते-डुलते टूट गए।
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