प्रयच्छ तानि न: कृष्ण गन्धलोभितचेतसाम् ।
वाञ्छास्ति महती राम गम्यतां यदि रोचते ॥ २६ ॥
अनुवाद
हे कृष्ण! कृपया हमारे लिए वे फल ले आओ। हमारे मन उनकी सुगंध से बहुत आकर्षित हैं! हे बलराम, उन फलों को प्राप्त करने की हमारी इच्छा बहुत अधिक है। यदि आप सोचते हैं कि यह एक अच्छा विचार है, तो चलिए उस तालवन में चलें।
O Krishna! Please bring us those fruits. Our minds are very much attracted by their fragrance. O Balarama, our desire to obtain those fruits is very strong. If you think this idea is good, then let us go to that taal grove.
तात्पर्य
हालाँकि न तो मनुष्य, न पक्षी और न ही पशु ताला के जंगल के पास जा सकते हैं, लेकिन ग्वाले लड़कों की भगवान श्री कृष्ण और भगवान बलराम पर इतनी आस्था थी कि वे मानते थे कि दोनों भगवान आसानी से पापी गधे के राक्षसों को मार सकते हैं और स्वादिष्ट ताला फल प्राप्त कर सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण के ग्वाले मित्र उन्नत, आत्म-साक्षात्कारी आत्माएं हैं जो आम तौर पर मीठे फलों के लिए लालची नहीं होंगी। वास्तव में, वे केवल भगवान से मज़ाक कर रहे हैं और उनके लीलाओं को प्रेरित कर रहे हैं, उनसे ताला के जंगल में अभूतपूर्व वीरतापूर्ण कार्य करने का आग्रह कर रहे हैं। असंख्य राक्षसों ने भगवान श्री कृष्ण की उपस्थिति के दौरान वृंदावन के उदात्त वातावरण को परेशान किया, और भगवान ऐसे राक्षसों को एक लोकप्रिय दैनिक कार्यक्रम के रूप में मार डालेंगे। चूँकि भगवान श्री कृष्ण पहले ही कई राक्षसों को मार चुके थे, इसलिए इस विशेष दिन उन्होंने भगवान बलराम को सम्मान देने का फैसला किया, जो पहले राक्षस, धेनुक का विनाश करेंगे। यदी रोचते शब्दों से, ग्वाले लड़के संकेत देते हैं कि भगवान श्री कृष्ण और भगवान बलराम को केवल उन्हें संतुष्ट करने के लिए राक्षस को मारने की ज़रूरत नहीं है; बल्कि, उन्हें ऐसा तभी करना चाहिए जब खुद भगवान को अवधारणा आकर्षक लगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥