श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.15.24 
तस्मात् कृतनराहाराद् भीतैर्नृभिरमित्रहन् ।
न सेव्यते पशुगणै: पक्षिसङ्घैर्विवर्जितम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
धेनुकासुर राक्षस ने जीवित लोगों को खा लिया है, इसलिए सभी लोग और पशु तालवन जाने से डरते हैं। हे शत्रुओं का नाश करने वाले, पक्षी तक भी वहाँ उड़ने से डरते हैं।
 
धेनुकासुर राक्षस ने जीवित लोगों को खा लिया है, इसलिए सभी लोग और पशु तालवन जाने से डरते हैं। हे शत्रुओं का नाश करने वाले, पक्षी तक भी वहाँ उड़ने से डरते हैं।
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