तस्मात् कृतनराहाराद् भीतैर्नृभिरमित्रहन् ।
न सेव्यते पशुगणै: पक्षिसङ्घैर्विवर्जितम् ॥ २४ ॥
अनुवाद
धेनुकासुर राक्षस ने जीवित लोगों को खा लिया है, इसलिए सभी लोग और पशु तालवन जाने से डरते हैं। हे शत्रुओं का नाश करने वाले, पक्षी तक भी वहाँ उड़ने से डरते हैं।
Dhenukasur has eaten living humans, so all people and animals are afraid to go to Talavan. O enemy killer, even birds are afraid to fly.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण और भगवान बलराम के ग्वाले मित्रों ने दोनों भाइयों को एक साथ ताल वन में जाकर गधे के रूप में जन्मे राक्षस को मार डालने के लिए प्रोत्साहित किया। वास्तव में, यहाँ उन्होंने भाइयों को अमित्र-हन, "शत्रु का हत्यारा" कहकर संबोधित किया। ग्वाल बालक भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व की शक्ति पर उत्साहपूर्ण ध्यान में लगे हुए थे और इस प्रकार तर्क कर रहे थे: "कृष्ण पहले ही बाका और अघ जैसे भयानक राक्षसों को मार चुके हैं, तो धेनुका नामक इस घृणित गधे में क्या खास बात है, जो वृंदावन में शत्रु नंबर एक बन गया है?" ग्वाले बालक चाहते थे कि कृष्ण और बलराम राक्षसों को मार डालें ताकि वृंदावन के सभी धर्मी निवासी ताल वन में फलों का आनंद ले सकें। इस प्रकार उन्होंने विशेष उपकार की प्रार्थना की कि गधा राक्षसों को मार दिया जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥