Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.15.19: इस तरह सुन्दर कमल जैसे चरणों वाले, जिनकी लक्ष्मी स्वयं सेवा करती हैं, भगवान्, अपनी अंतर्निहित शक्ति के द्वारा, अपनी अलौकिक शक्तियों को छुपाकर, एक ग्वाले के पुत्र की तरह व्यवहार करते हैं। ग्रामीण बालक के समान अन्य ग्रामीणों के साथ घूमते हुए, वे कभी-कभी ऐसे करतब दिखाते हैं जो केवल भगवान ही कर सकते हैं। | bhagavat अध्याय 10.15: धेनुकासुर का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं निगूढात्मगति: स्वमायया
गोपात्मजत्वं चरितैर्विडम्बयन् ।
रेमे रमालालितपादपल्लवो
ग्राम्यै: समं ग्राम्यवदीशचेष्टित: ॥ १९ ॥
अनुवाद
इस तरह सुन्दर कमल जैसे चरणों वाले, जिनकी लक्ष्मी स्वयं सेवा करती हैं, भगवान्, अपनी अंतर्निहित शक्ति के द्वारा, अपनी अलौकिक शक्तियों को छुपाकर, एक ग्वाले के पुत्र की तरह व्यवहार करते हैं। ग्रामीण बालक के समान अन्य ग्रामीणों के साथ घूमते हुए, वे कभी-कभी ऐसे करतब दिखाते हैं जो केवल भगवान ही कर सकते हैं।
In this way the Lord, whose soft feet are served by Goddess Lakshmi herself, would hide His divine opulence by His inner power and act like a cowherd's son. While roaming around with the other villagers like a village boy, He would sometimes perform feats which only God can perform.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥