श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.15.14 
क्‍वचित् क्रीडापरिश्रान्तं गोपोत्सङ्गोपबर्हणम् ।
स्वयं विश्रमयत्यार्यं पादसंवाहनादिभि: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
जब उनके बड़े भाई खेल-खेल कर थक जाते और किसी ग्वाले के बच्चे की गोद में सिर रखकर लेट जाते, तब भगवान कृष्ण स्वयं बलराम के पैर दबाकर और दूसरी सेवाएँ करके उनकी थकान दूर करते।
 
When his elder brothers would get tired while playing and lie down with their heads in the lap of a cowherd boy, Lord Krishna himself would relieve their fatigue by massaging Balarama's feet and providing other services.
तात्पर्य
शब्द ‘पाद-संवाहनदिभिः’ दर्शाता है कि श्री कृष्ण बलराम जी के पैरों की मालिश करते थे, उन्हें पंखा करते थे और उनके पीने के लिए नदी का पानी लाते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)