यहां ब्रह्मा भगवान कृष्ण को ईश कहते हैं, जो इंगित करता है कि कृष्ण न केवल सभी के सर्वोच्च स्वामी हैं बल्कि विशेष रूप से ब्रह्मा के भी स्वामी हैं, जो भगवान के मार्गदर्शन में सीधे ब्रह्मांड का निर्माण करते हैं और जो वास्तव में, सीधे भगवान के शरीर से ही पैदा हुए हैं।
भगवान कृष्ण को बहकाने के अपने अशिष्ट प्रयास से ब्रह्मा को शर्म आ गई, और इसलिए वह भगवान के निर्णय के अनुसार दंडित किए जाने या क्षमा किए जाने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। यदि भगवान कृष्ण अपने भक्तों को अनुचित कार्य करने पर दयापूर्वक दंडित नहीं करते हैं, तो उनकी मूर्खता केवल बढ़ेगी और धीरे-धीरे उनकी भक्ति भावनाओं को पूरी तरह से अभिभूत कर देगी। इसलिए भगवान कृष्ण अपने भक्तों को दयापूर्वक अनुशासित करते हैं और उन्हें वापस घर, भगवान के पास जाने के लिए प्रगतिशील पथ पर बनाए रखते हैं।
