श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 14: ब्रह्मा द्वारा कृष्ण की स्तुति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.14.7 
गुणात्मनस्तेऽपि गुणान् विमातुं
हितावतीर्णस्य क ईशिरेऽस्य ।
कालेन यैर्वा विमिता: सुकल्पै-
र्भूपांशव: खे मिहिका द्युभास: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
समय बीतने के साथ, बुद्धिमान दार्शनिक या वैज्ञानिक पृथ्वी के सभी परमाणुओं, बर्फ के कणों या शायद सूर्य, तारों और अन्य प्रकाशमानों से निकलने वाले चमकदार अणुओं की भी गिनती करने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन इन विद्वानों में ऐसा कौन है, जो आप में, पूर्ण पुरुषोत्तम परमेश्वर में निहित अनंत दिव्य गुणों का आकलन कर सके। ऐसे भगवान सभी जीवों के कल्याण के लिए इस धरती पर अवतरित हुए हैं।
 
In course of time, learned philosophers or scientists may be able to count all the atoms of the earth, snowflakes or perhaps even the particles of light emanating from the sun, stars and planets, but who among these learned men can estimate the infinite divine qualities inherent in You, the Supreme Personality of Godhead. Such a Lord has descended on this earth for the welfare of all living entities.
तात्पर्य
श्रील सनातन गोस्वामी बताते हैं कि भगवान् कृष्ण "गुणात्मा", "सारे श्रेष्ठ गुणों की आत्मा" हैं, क्योंकि वे उन्हें जीवन देते हैं। उदाहरण के लिए, व्यक्ति उदारता, बुद्धिमत्ता और दया जैसे गुणों पर सैद्धांतिक रूप से चर्चा कर सकता है, लेकिन वे तभी जीवंत होते हैं जब कोई जीवित व्यक्ति उनका प्रदर्शन करता है। इस प्रकार भगवान कृष्ण गुणात्मा हैं क्योंकि वे भौतिक जगत में अवतरित होते हैं और सभी ईश्वरीय गुणों को स्वयं प्रदर्शित करके और दूसरों में उन्हें प्रेरित करके धार्मिक सिद्धांतों को पुनः स्थापित करते हैं। एक जीवित प्राणी जो भगवान में पाए जाने वाले पारलौकिक गुणों को विकसित करता है, उसे अथाह लाभ प्राप्त होता है और अंततः वह भगवान के साथ उनके अपने निवास में वापस चला जाता है, जहाँ सभी जीवित प्राणी मुक्त हो जाते हैं और पारलौकिक प्रकृति से पूरी तरह संपन्न होते हैं।

श्रील सनातन गोस्वामी आगे बताते हैं कि भगवान प्रत्येक जीवित प्राणी के लाभ के लिए एक विशिष्ट आध्यात्मिक गुण प्रकट करते हैं। चूँकि भौतिक सृष्टि की सीमाओं के भीतर असंख्य जीवित प्राणी हैं, भगवान अनंत गुणों को प्रकट करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक बद्ध आत्मा परमेश्वर की सराहना एक विशेष तरीके से कर सकती है।

यहाँ उदाहरण दिया गया है कि अगर सबसे अधिक विद्वान विद्वान भी किसी दिन पृथ्वी, हिम और प्रकाश के कणों को गिन पाएँ, तब भी वे भगवान के गुणों को समझने में विफल रहेंगे। इस उदाहरण में पृथ्वी, हिम और प्रकाश उत्तरोत्तर अधिक सूक्ष्म हैं; इस प्रकार यह समझा जाना चाहिए कि उनके लगभग अनंत कणों की गणना करना कठिनाई बढ़ती जाती है।

श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अनुसार, भगवान संकर्षण जैसे महान व्यक्तित्वों ने वास्तव में पृथ्वी पर परमाणुओं की संख्या और यहाँ तक कि पूरे ब्रह्मांड में अणुओं की गणना की है। फिर भी संकर्षण जैसे व्यक्तित्व ने, जो अनादि काल से भगवान के गुणों का निरंतर जाप करते आ रहे हैं, उन गुणों की अंतिम गणना तक भी नहीं पहुँचे हैं।

भगवान कृष्ण वृंदावन में अपने बचपन के मनोरंजनों के दौरान अपने सबसे आश्चर्यजनक गुणों का प्रदर्शन करते हैं, जहां वह गोपियों से मक्खन चुराते हैं, अपनी प्रेमिकाओं के साथ नृत्य करते हैं, और अपने चरवाहे प्रेमी के साथ उनके सबसे प्रिय साथी के रूप में खेलते हैं। हालाँकि साधारण मानवीय गतिविधियों की तरह दिखाई देता है, ऐसे उदात्त मनोरंजन भगवान कृष्ण के अथाह और असंख्य सुंदर पारलौकिक गुणों का प्रतीक हैं, जो शुद्ध भक्तों के जीवन और आत्मा हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)