श्रील सनातन गोस्वामी आगे बताते हैं कि भगवान प्रत्येक जीवित प्राणी के लाभ के लिए एक विशिष्ट आध्यात्मिक गुण प्रकट करते हैं। चूँकि भौतिक सृष्टि की सीमाओं के भीतर असंख्य जीवित प्राणी हैं, भगवान अनंत गुणों को प्रकट करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक बद्ध आत्मा परमेश्वर की सराहना एक विशेष तरीके से कर सकती है।
यहाँ उदाहरण दिया गया है कि अगर सबसे अधिक विद्वान विद्वान भी किसी दिन पृथ्वी, हिम और प्रकाश के कणों को गिन पाएँ, तब भी वे भगवान के गुणों को समझने में विफल रहेंगे। इस उदाहरण में पृथ्वी, हिम और प्रकाश उत्तरोत्तर अधिक सूक्ष्म हैं; इस प्रकार यह समझा जाना चाहिए कि उनके लगभग अनंत कणों की गणना करना कठिनाई बढ़ती जाती है।
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अनुसार, भगवान संकर्षण जैसे महान व्यक्तित्वों ने वास्तव में पृथ्वी पर परमाणुओं की संख्या और यहाँ तक कि पूरे ब्रह्मांड में अणुओं की गणना की है। फिर भी संकर्षण जैसे व्यक्तित्व ने, जो अनादि काल से भगवान के गुणों का निरंतर जाप करते आ रहे हैं, उन गुणों की अंतिम गणना तक भी नहीं पहुँचे हैं।
भगवान कृष्ण वृंदावन में अपने बचपन के मनोरंजनों के दौरान अपने सबसे आश्चर्यजनक गुणों का प्रदर्शन करते हैं, जहां वह गोपियों से मक्खन चुराते हैं, अपनी प्रेमिकाओं के साथ नृत्य करते हैं, और अपने चरवाहे प्रेमी के साथ उनके सबसे प्रिय साथी के रूप में खेलते हैं। हालाँकि साधारण मानवीय गतिविधियों की तरह दिखाई देता है, ऐसे उदात्त मनोरंजन भगवान कृष्ण के अथाह और असंख्य सुंदर पारलौकिक गुणों का प्रतीक हैं, जो शुद्ध भक्तों के जीवन और आत्मा हैं।
