Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.14.35: मेरा चित्त मोहग्रस्त हो जाता है यह सोचते हुए कि क्या ऐसा कोई पुरस्कार है जो आपके अतिरिक्त भी हो सकता है? आप समस्त वरदानों के साकार रूप हैं जो आप वृंदावन की ग्वाल जाति के निवासियों को प्रदान करते हैं। आपने पहले ही पूतना और उसके परिवार वालों को अपने आप को अर्पित कर दिया था, क्योंकि उसने भक्त का रूप धारण किया था। तो वृंदावन के इन भक्तों को आप और क्या दे सकते हैं, जिनके घर, धन, मित्रगण, प्रिय परिजन, शरीर, सन्तानें, प्राण और हृदय—सभी केवल आपको ही समर्पित हैं? | bhagavat अध्याय 10.14: ब्रह्मा द्वारा कृष्ण की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरा चित्त मोहग्रस्त हो जाता है यह सोचते हुए कि क्या ऐसा कोई पुरस्कार है जो आपके अतिरिक्त भी हो सकता है? आप समस्त वरदानों के साकार रूप हैं जो आप वृंदावन की ग्वाल जाति के निवासियों को प्रदान करते हैं। आपने पहले ही पूतना और उसके परिवार वालों को अपने आप को अर्पित कर दिया था, क्योंकि उसने भक्त का रूप धारण किया था। तो वृंदावन के इन भक्तों को आप और क्या दे सकते हैं, जिनके घर, धन, मित्रगण, प्रिय परिजन, शरीर, सन्तानें, प्राण और हृदय—सभी केवल आपको ही समर्पित हैं?
My mind becomes bewildered when I try to think of what other reward there can be anywhere besides You. You are the very embodiment of all the benedictions that You bestow on the cowherds of Vrindavan. You have already given Yourself to Putana and her family in exchange for her disguising herself as a devotee. What, then, is left for You to give to these devotees of Vrindavan whose homes, wealth, friends, loved ones, bodies, children, souls and hearts—all have surrendered to You alone?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥