फिर भी, एक दूसरे अर्थ में, यह ब्रह्मांड वास्तविक है। वेदान्त-सूत्र पर अपनी टीका में, श्रील माध्वाचार्य ने वैदिक श्रुति-मंत्रों से निम्नलिखित कथन उद्धृत करके इसकी पुष्टि की है: सत्यं ह्य एवेदं विश्वं असृजत। "भगवान द्वारा बनाया गया यह ब्रह्मांड वास्तविक है।" वेदों का पूर्ण अधिकार इस प्रकार इस ब्रह्मांड को वास्तविक होने का प्रमाणित करता है; फिर भी, क्योंकि हमारे ज्ञान को भ्रम (जैसा कि यहां अष्टा-धिषणम शब्दों द्वारा इंगित किया गया है) द्वारा चुरा लिया गया है, हम इस ब्रह्मांड या उस परम प्रभु को ठीक से समझ नहीं सकते हैं जिसने इसे बनाया है। भगवान कृष्ण के विस्तार के रूप में, ब्रह्मांड वास्तविक है और उनकी सेवा में व्यस्त रहने के लिए है। जो व्यक्ति भगवान के राज्य को घर के रूप में स्वीकार करता है, स्वयं भगवान को प्रेम की वस्तु के रूप में, और भौतिक ब्रह्मांड भगवान की सेवा में व्यस्त रहने के लिए सामग्री के रूप में स्वीकार करता है वह शाश्वत वास्तविकता के भीतर निवास करता है जहां भी वह भौतिक और आध्यात्मिक दुनिया में जा सकता है।
