अद्यैव त्वदृतेऽस्य किं मम न ते मायात्वमादर्शित-
मेकोऽसि प्रथमं ततो व्रजसुहृद्वत्सा: समस्ता अपि ।
तावन्तोऽसि चतुर्भुजास्तदखिलै: साकं मयोपासिता-
स्तावन्त्येव जगन्त्यभूस्तदमितं ब्रह्माद्वयं शिष्यते ॥ १८ ॥
अनुवाद
क्या आपने मुझे आज यह नहीं दिखाया कि आप स्वयं और इस सृष्टि की प्रत्येक वस्तु आपकी अचिन्त्य शक्ति के ही प्रकटीकरण हैं? सर्वप्रथम आप अकेले प्रकट हुए, तत्पश्चात् आप वृन्दावन के बछड़ों और अपने मित्र ग्वालबालों के रूप में प्रकट हुए। इसके बाद आप उतने ही चतुर्भुजी विष्णु रूपों में प्रकट हुए जिनकी हम सब पूजा कर रहे थे। तत्पश्चात् आप उतने ही संपूर्ण ब्रह्माण्डों के रूप में प्रकट हुए। तत्पश्चात् आप अद्वितीय परम ब्रह्म के अपने अनन्त रूप में लौट आए हैं।
Have you not shown me today that You and everything in this universe are manifestations of Your inconceivable power? First You appeared alone, then You appeared as the calves of Vrindavan and Your cowherd friends. Then You appeared in the same number of four-armed Visnu forms that were being worshipped by all living entities, including me. Then You appeared in the same number of entire universes. Thereafter You have returned to Your infinite form of the unique Supreme Brahman.
तात्पर्य
जैसे वेद काल में कहा गया है, सर्वं खल्विदं ब्रह्मः: सब कुछ जो है, वह परम भगवान का ही विस्तार है। इस प्रकार सब कुछ अंततः भगवान के आध्यात्मिक अस्तित्व का एक अभिन्न अंग है। भगवान कृष्ण की निःस्वार्थ दया से, भगवान ब्रह्मा ने व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया कि सारा अस्तित्व, ईश्वर की शक्ति होने के कारण, उससे अलग नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥