इस श्लोक में कवाला शब्द उस चावल के दाने को संदर्भित करता है जिसे कृष्ण ने अपने बाएं हाथ में दही के साथ मिश्रित किया था। सनातन गोस्वामी के अनुसार, भगवान ने एक गाय को चराने वाली छड़ी और एक भैंस का सींग अपने बाएं बाजू के नीचे दबाया हुआ था, और उनकी बांसुरी उनकी बेल्ट के नीचे रखी गई थी। सुंदर युवा कृष्ण, बहुरंगी वन खनिजों से सजे हुए, वैकुंठ की संपत्ति से कहीं अधिक संपन्नता का प्रदर्शन करते थे। यद्यपि ब्रह्मा ने भगवान के असंख्य चार हाथ वाले रूप देखे थे, लेकिन अब उन्होंने कृष्ण के दो हाथ वाले रूप के चरण कमलों में आत्मसमर्पण कर दिया, जो नंद महाराज के पुत्र के रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा ने अपनी प्रार्थनाएँ उस मूर्ति को अर्पित कीं।
