उन सबके चार हाथ थे, जिनमें शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किये थे। उनके सिरों पर मुकुट पहने थे, कानों में कुंडल और गलों में जंगली फूलों की मालाएँ थीं। उनके दाहिने सीने के ऊपरी भाग पर लक्ष्मी का चिह्न था। उनकी बाहों में बाजूबंद, गले में शंख जैसी तीन रेखाओं से अंकित कौस्तुभ मणि और कलाइयों में कंगन थे। उनके पाँवों में पायल, टखनों में आभूषण और कमर में पवित्र करधनी थी। वे सभी अत्यंत सुंदर लग रहे थे।
All of them had four hands in which they held conch, discus, mace and lotus. They wore crowns on their heads, earrings in their ears and garlands of wild flowers around their necks. There was a symbol of Lakshmi on the upper right side of their breasts. They wore armlets on their arms, Kaustubha Mani on their necks marked with three lines like conches and bracelets on their wrists. They had anklets on their ankles, ornaments on their feet and a sacred girdle around their waists. They all looked very beautiful.
तात्पर्य
सभी विष्णु रूपों की चार भुजाएँ थीं, शंख और अन्य चीज़ों के साथ, लेकिन ये विशेषताएँ भी उन लोगों के पास पाई जाती हैं जिन्होंने वैकुंठ में सारूप्य-मुक्ति प्राप्त की है और जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भगवान के रूप जैसा ही रूप प्राप्त हुआ है। हालाँकि, भगवान् ब्रह्मा के समक्ष प्रकट होने वाले इन विष्णु रूपों में श्रीवत्स का चिह्न और कौस्तुभ मणि भी था, जो कि केवल स्वयं सर्वोच्च भगवान के पास पाई जाने वाली विशेष विशेषताएँ हैं। यह साबित करता है कि ये सभी लड़के और बछड़े वास्तव में विष्णु, भगवान के व्यक्तित्व के प्रत्यक्ष रूप थे, न कि केवल उनके वैकुंठ के सहयोगी। स्वयं विष्णु कृष्ण में शामिल हैं। विष्णु के सभी वैभव पहले से ही कृष्ण में मौजूद हैं, और फलस्वरूप कृष्ण के लिए इतने विष्णु रूपों का प्रदर्शन करना वास्तव में बहुत आश्चर्यजनक नहीं था। वैष्णव-तोषणी द्वारा श्रीवत्स के चिह्न को भगवान विष्णु के सीने के दाईं ओर ऊपरी हिस्से में महीन पीले बाल के रूप में वर्णित किया गया है। यह चिह्न सामान्य भक्तों के लिए नहीं है। यह विष्णु या कृष्ण का विशेष चिह्न है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥