श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.13.32 
गोपास्तद्रोधनायासमौघ्यलज्जोरुमन्युना ।
दुर्गाध्वकृच्छ्रतोऽभ्येत्य गोवत्सैर्दद‍ृशु: सुतान् ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
ग्वालों को अपनी गायों को उनके बछड़ों के पास जाने से रोकने में असमर्थ देखकर लज्जा और गुस्सा आ गया। उन्होंने बड़ी मुश्किल से ऊबड़-खाबड़ रास्ते को पार किया, लेकिन जब वे नीचे उतरे और अपने बेटों को देखा तो वे असीम प्रेम से भर गए।
 
The cowherds were not only ashamed but also angry as they were unable to stop the cows from going to their calves. They crossed the difficult path with great difficulty but when they came down and saw their sons, they were overwhelmed with immense affection.
तात्पर्य
कृष्ण के प्रति सभी का स्नेह बढ़ता ही जाता था । जब गोप पहाड़ी से उतरकर अपने-अपने पुत्रों को देखते थे, जो कोई और नहीं बल्कि कृष्ण ही थे, तो उनका स्नेह और भी बढ़ जाता था ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)