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bhagavat 10.13.3: हे राजन्, कृपया मेरी बात को ध्यान से सुनें। यद्यपि भगवान की लीलाएँ अत्यन्त गुह्य हैं और कोई सामान्य व्यक्ति उन्हें नहीं समझ सकता, फिर भी मैं तुम्हें उनके बारे में बताऊँगा क्योंकि गुरुजन एक विनम्र शिष्य को गुह्य से गुह्य और कठिन से कठिन विषयों को भी बता देते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.13.3 
श‍ृणुष्वावहितो राजन्नपि गुह्यं वदामि ते ।
ब्रूयु: स्‍निग्धस्य शिष्यस्य गुरवो गुह्यमप्युत ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, कृपया मेरी बात को ध्यान से सुनें। यद्यपि भगवान की लीलाएँ अत्यन्त गुह्य हैं और कोई सामान्य व्यक्ति उन्हें नहीं समझ सकता, फिर भी मैं तुम्हें उनके बारे में बताऊँगा क्योंकि गुरुजन एक विनम्र शिष्य को गुह्य से गुह्य और कठिन से कठिन विषयों को भी बता देते हैं।
 
O King, listen to me attentively. Although the divine pastimes of the Lord are very secret and cannot be understood by an ordinary person, I will tell you about them because the Guru explains the most secret and difficult subjects to a humble disciple.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)