इस प्रकार खुद को ग्वाल बालों और बछड़ों का समूह बना लेने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपने को उसी रूप में बनाए रखा। वे उसी प्रकार से वृन्दावन तथा जंगल दोनों ही जगहों में एक साल तक लीला करते रहे।
Having transformed himself into a group of cowherd boys and calves, Lord Krishna continued to remain in that form. He continued to perform his pastimes in the same manner in both Vrindavan and the forest for a year.
तात्पर्य
सब कुछ कृष्ण थे। बछड़े, गोप और उनके स्वामी स्वयं कृष्ण थे। दूसरे शब्दों मे, कृष्ण ने स्वयं को बछड़ो और गोपों के विविध रूपों में विस्तारित किया और एक वर्ष तक अपनी लीलाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रखीं। जैसे कि भागवत-गीता में कहा गया है, कृष्ण का विस्तार सभी के हृदय में परमात्मा के रूप में स्थित है। इसी प्रकार, परमात्मा के रूप में स्वयं का विस्तार करने के बजाय, उन्होंने एक वर्ष तक खुद का विस्तार बछड़ों और गोपों के रूप में किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥