शुरुआत से ही गोपियों का कृष्ण के प्रति माँ जैसा स्नेह था। वास्तव में, कृष्ण के प्रति उनका स्नेह अपने बेटों के प्रति स्नेह से भी अधिक था। अपने स्नेह को प्रदर्शित करने में, उन्होंने कृष्ण और अपने बेटों में भेद किया था, लेकिन अब वह भेद गायब हो गया था।
From the very beginning, the gopis had a motherly affection for Krishna. This affection for Krishna was greater than their affection for their own sons. In this way, in expressing their affection, they used to differentiate between Krishna and their own sons, but now that distinction had been removed.
तात्पर्य
अपने और दूसरे के बेटे के बीच का भेद स्वाभाविक नहीं है। कई वृद्ध महिलाओं में दूसरे के बेटों के लिए ममता का भाव होता है। फिर भी, वे दूसरे बेटों और अपने बेटों में भेद करती हैं। लेकिन अब वृद्ध गोपियाँ अपने बेटों और कृष्ण में भेद नहीं कर पा रही थीं, क्योंकि ब्रह्मा ने उनके बेटों को ले लिया था, इसलिए कृष्ण ने अपने आपको उनके बेटों के रूप में विस्तारित कर लिया था। इसलिए, अपने बेटों के लिए उनका अतिरिक्त स्नेह, जो अब स्वयं कृष्ण थे, ब्रह्मा की तरह ही विस्मय के कारण था। पहले, श्रीदामा, सुदामा, सुबल और कृष्ण के अन्य साथियों की माताओं में एक-दूसरे के बेटों के लिए समान स्नेह नहीं था, लेकिन अब गोपियाँ सभी लड़कों के साथ अपने ही बेटों की तरह व्यवहार करती थीं। इसलिए, शुकदेव गोस्वामी कृष्ण द्वारा ब्रह्मा, गोपियों, गायों और सभी के भ्रम की दृष्टि से इस स्नेह वृद्धि की व्याख्या करना चाहते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥