श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.13.23 
ततो नृपोन्मर्दनमज्जलेपना-
लङ्काररक्षातिलकाशनादिभि: ।
संलालित: स्वाचरितै: प्रहर्षयन्
सायं गतो यामयमेन माधव: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
तदनंतर, हे महाराज परीक्षित, अपनी लीलाओं के कार्यक्रम के अनुसार श्री कृष्ण शाम को लौटते, प्रत्येक ग्वाले के घर में प्रवेश करते और हूबहू उसी बालक की तरह कार्य करते, जिससे उनकी माताओं को दिव्य आनंद प्राप्त होता। माताएँ अपने बालकों का तेल से मालिश करके, उन्हें नहलाकर, उनके शरीर पर चंदन का लेप करके, उन्हें गहनों से सजाकर, रक्षा मंत्र पढ़कर, उनके शरीर पर तिलक लगाकर, और उन्हें भोजन कराकर उनकी देखभाल करती थीं। इस प्रकार माताएँ अपने हाथों से श्री कृष्ण की सेवा करती थीं।
 
Thereafter, O Maharaja Pariksit, according to the program of His pastimes, Krishna would return in the evening, enter each cowherd boy's house and act like real children, giving their mothers divine pleasure. The mothers would care for their children, anoint them with oil, bathe them, put sandalwood paste on them, adorn them with ornaments, recite the Raksha-mantra, put a mark on their bodies and feed them. In this way the mothers would serve Krishna with their own hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)