ततो वत्सानदृष्ट्वैत्य पुलिनेऽपि च वत्सपान् ।
उभावपि वने कृष्णो विचिकाय समन्तत: ॥ १६ ॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, जब कन्हैया को बछड़े न मिल सके, तो वह यमुना के तट पर लौट आए, लेकिन वहाँ उन्होंने ग्वालों को भी नहीं देखा। तब वह बछड़ों और बालकों को इस तरह ढूँढने लगे, मानों वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि आख़िर क्या हुआ है।
Then when Krishna could not find the calves, he returned to the banks of the Yamuna but he did not see the cowherd boys there either. In this way he started looking for the calves and the children as if he could not understand what had happened.
तात्पर्य
कृष्ण तुरंत समझ गए कि ब्रह्मा दोनों बछड़ों और बालकों को चुरा ले गए हैं, लेकिन एक निर्दोष बच्चे की तरह वो इधर-उधर ढूंढने लगे ताकि ब्रह्मा कृष्ण की माया को न समझ पाएं। यह सब एक नाटकीय प्रदर्शन था। एक कलाकार सब कुछ जानता है, लेकिन फिर भी वो मंच पर कुछ इस तरह अभिनय करता है कि दूसरे उसे समझ न पाएं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)