ब्रह्मा अपनी माया से परीक्षण करना चाहते थे कि क्या कृष्ण वास्तव में उपस्थित हैं। ये ग्वाले तो कृष्ण के व्यक्तिगत आत्मा (आनंद-चिन्मय-रस-प्रतिभाविताबिः) के विस्तार मात्र थे। बाद में कृष्ण, ब्रह्मा को दिखाएँगे कि कैसे वह अपने व्यक्तिगत आनंद, आनंद-चिन्मय-रस के रूप में स्वयं को हर चीज में विस्तारित करते हैं। ह्लादिनी शक्तिरास्मात: कृष्ण के पास ह्लादिनी शक्ति नामक एक अलौकिक शक्ति है। वह ऐसी किसी भी चीज़ का आनंद नहीं लेते जो भौतिक ऊर्जा का उत्पाद हो। इसलिए, ब्रह्मा भगवान कृष्ण को अपनी ऊर्जा का विस्तार करते हुए देखेंगे।
ब्रह्मा कृष्ण के साथियों को ले जाना चाहते थे, लेकिन इसके बजाय वे कुछ अन्य लड़कों और बछड़ों को ले गए। रावण सीता को ले जाना चाहता था, लेकिन यह असंभव था, और इसके बजाय वह एक माया सीता को ले गया। इसी तरह, ब्रह्मा मायार्भाках को ले गए: कृष्ण की माया से प्रकट हुए लड़के। ब्रह्मा मायार्भाका को कुछ असाधारण वैभव दिखा सकते थे; लेकिन वे कृष्ण के साथियों को कोई असाधारण शक्ति नहीं दिखा सके। कि वह निकट भविष्य में ही देखेंगे। मायार्भकस्य ईशितुः। इस विस्मय, इस माया का कारण सर्वोच्च नियंत्रक, प्रभावतः - सर्व-शक्तिशाली सर्वोच्च व्यक्ति, कृष्ण - थे और हम इसका परिणाम देखेंगे। भौतिक रूप से जन्मा कोई भी व्यक्ति विस्मय के अधीन होता है। इसलिए इस लीला को ब्रह्म-विमोहन-लीला, ब्रह्मा को विचलित करने वाला मनोरंजन कहा जाता है। मोहितं नाभिजानाति मामेभ्य: परमव्ययम (भागवत गीता। 7.13)। भौतिक रूप से जन्मे व्यक्ति कृष्ण को पूरी तरह से समझ नहीं सकते। यहाँ तक कि देवता भी उन्हें नहीं समझ सकते (मुह्यन्ति यत् सूर्यः)। तेने ब्रह्मा हृदा या आदि-कवये (भागवत पुराण। 1.1.1)। ब्रह्मा से लेकर छोटे से कीट तक सभी को कृष्ण से सबक लेना चाहिए।
