बिभ्रद् वेणुं जठरपटयो: शृङ्गवेत्रे च कक्षे
वामे पाणौ मसृणकवलं तत्फलान्यङ्गुलीषु ।
तिष्ठन् मध्ये स्वपरिसुहृदो हासयन् नर्मभि: स्वै:
स्वर्गे लोके मिषति बुभुजे यज्ञभुग् बालकेलि: ॥ ११ ॥
अनुवाद
कृष्ण यज्ञ-भुक् हैं, अर्थात् वे केवल यज्ञ की आहुतियों का भक्षण करते हैं, किन्तु अपनी बाल लीलाओं को प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने अपनी वंशी को अपनी कमर और दाहिनी ओर कसे वस्त्र के बीच तथा सींग के बिगुल और गाय चराने की लाठी को बाईं ओर खोंस रखा था। उन्होंने अपने हाथ में दही और चावल का बना हुआ स्वादिष्ट व्यंजन ले रखा था और अपनी अँगुलियों के बीच में उपयुक्त फलों के टुकड़े दबा रखे थे। वे कमल के फूल की कली की तरह बैठे थे और अपने सभी मित्रों की ओर देख रहे थे। वे खाते हुए उनसे हँसी-मज़ाक भी कर रहे थे, जिससे वे सभी ठहाके लगा रहे थे। उस समय स्वर्ग के निवासी यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि यज्ञ भुक् भगवान अब अपने मित्रों के साथ जंगल में बैठ कर भोजन कर रहे हैं।
Krishna is yajna-bhuk—that is, He eats only the offerings of sacrifices, but to display His childlike pastimes, He sat with His flute tucked between His waist and His right side, and His horn bugle and cowherd stick tucked in His left side. He sat like a lotus cocoon, with a beautiful dish of curds and rice in His hand and pieces of suitable fruits between His fingers. He was looking ahead at all His friends and while eating, He was mocking them, which made everyone laugh. At that time, the inhabitants of heaven were watching and were amazed at how the yajna-bhuk Bhagavan was now sitting in the forest and eating with His friends.
तात्पर्य
जब कृष्ण अपने ग्वाला बाल-सखाओं के साथ खाना खा रहे थे, एक भ्रमर उसी समय खाने में भाग लेने के लिए आ गया। इस पर कृष्ण ने मज़ाक करते हुए कहा, “तुम मेरे ब्राह्मण मित्र मधुमंगल को परेशान करने यहाँ क्यों आये हो? तुम एक ब्राह्मण को मारना चाहते हो। यह अच्छा नहीं है।” सभी लड़के खाना खाते हुए इस तरह के मज़ाकिया शब्दों को बोलकर हँसते और आनंद लेते। इस प्रकार उच्च ग्रहों के निवासी चकित रह गए कि कैसे भगवान, जो केवल यज्ञ की आहुति के बाद ही भोजन करते हैं, अब जंगल में अपने दोस्तों के साथ एक साधारण बच्चे की तरह भोजन कर रहे हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥