तद् ब्रूहि मे महायोगिन्परं कौतूहलं गुरो ।
नूनमेतद्धरेरेव माया भवति नान्यथा ॥ ४२ ॥
अनुवाद
हे महान योगी, मेरे आध्यात्मिक गुरु, कृपा करके यह बताएँ कि यह कैसे घटित हुआ? इसे जानने का मैं बहुत उत्सुक हूँ। मेरा विचार है कि कृष्ण की माया के सिवा कुछ और नहीं है।
O great Yogi, my spiritual master, please tell me how this happened. I am very anxious to know. I think this was nothing but another illusion of Krishna.
तात्पर्य
कृष्ण की अनेक शक्तियाँ हैं: परस्य शक्तिर्विविधैव श्रूयते (श्वेताश्वतर उपनिषद ६.८)। अगासुर का वर्णन एक वर्ष बाद प्रकट किया गया था। कृष्ण की शक्ति का कुछ कार्य निश्चित रूप से इसमें शामिल रहा होगा। इसलिए महाराज परीक्षित इसे जानने के लिए बहुत उत्सुक थे और उन्होंने शुकदेव गोस्वामी से इसे समझाने का अनुरोध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥