कृष्ण के पाँच वर्ष की आयु में उनकी अपने आप को और अपने साथियों को मृत्यु से बचाने तथा अघासुर को मोक्ष दिलाने की घटना घटित हुई थी। इसका उद्घाटन व्रजभूमि में एक वर्ष बाद हुआ, मानो यह उसी दिन की घटना हो।
The incident of saving himself and his companions from death and giving salvation to Aghasur in the form of a python happened when Krishna was five years old. Its revelation happened a year later in Vrajbhumi as if it was an incident of the same day.
तात्पर्य
मोक्षणम शब्द का अर्थ "मुक्ति" है। कृष्ण के साथियों और स्वयं कृष्ण के लिए, मुक्ति का कोई प्रश्न नहीं है; वे पहले से ही मुक्त हैं, आध्यात्मिक दुनिया में हैं। भौतिक दुनिया में जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और बीमारी है, लेकिन आध्यात्मिक दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है क्योंकि सब कुछ शाश्वत है। अजगर के लिए, हालांकि, कृष्ण और उनके भक्तों के सहयोग से, अघासुर ने भी शाश्वत जीवन की वही सुविधा प्राप्त की। इसलिए, जैसा कि यहां ātmāhi-mokṣaṇam शब्द से संकेत मिलता है, यदि अजगर अघासुर भगवान के साथ शाश्वत संबंध प्राप्त कर सकता है, तो उन लोगों के बारे में क्या कहा जाए जो पहले से ही भगवान के सहयोगी हैं? साकं विजहरू: कृता-पुण्य-पुंजाः (भाग। 10.12.11)। यहाँ इस बात का सबूत है कि ईश्वर सभी के लिए अच्छा है। जब भी वह किसी को मारता है, तो जो मारा जाता है वह मुक्ति प्राप्त करता है। तो उन लोगों के बारे में क्या कहा जाए जो पहले से ही भगवान के साथियों में हैं?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥