एवं प्रभोः प्रियानां च
धामनश्च समस्य च
अविचिन्त्य-प्रभावत्वाद
अत्र किञ्चिन न दुर्ग्टम
बृहद्भागवतामृत में श्री सनातन गोस्वामी कहते हैं कि चूँकि कृष्ण के बारे में सब कुछ असीमित है, इसलिए उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। इसी अर्थ में हमें इस श्लोक को समझना होगा।
