कृत्यं किमत्रास्य खलस्य जीवनं
न वा अमीषां च सतां विहिंसनम् ।
द्वयं कथं स्यादिति संविचिन्त्य
ज्ञात्वाविशत्तुण्डमशेषदृग्घरि: ॥ २८ ॥
अनुवाद
अब क्या उपाय करना चाहिए? इस राक्षस का वध और भक्तजनों की रक्षा दोनों एक साथ कैसे हो सकती है? असीम शक्तिशाली होने के कारण कृष्ण ने ऐसी कोई बुद्धिमानी से भरी युक्ति आने तक प्रतीक्षा करने का निर्णय किया जिससे वे बच्चों को बचाने के साथ-साथ उस राक्षस का वध भी कर सकें। इसके बाद वे अघासुर के मुँह में प्रवेश कर गए।
What was to be done now? How to kill this demon and save the devotees at the same time? Being infinitely powerful, Krishna decided to wait until he found a wise way by which he could kill the demon as well as save the children. Then he entered the mouth of Aghasur.
तात्पर्य
कृष्ण को अनंत-वीर्य-सर्वज्ञ कहा जाता है क्योंकि उन्हें सब कुछ ज्ञात है। चूंकि वह सब कुछ अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए उनके लिए एक ऐसा उपाय खोजना मुश्किल नहीं था जिसके द्वारा वह लड़कों को बचा सकें और साथ ही राक्षस को मार सकें। इस प्रकार उन्होंने भी राक्षस के मुंह में प्रवेश करने का निश्चय किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥