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bhagavat 10.12.25: हर व्यक्ति के हृदय में स्थित अन्तर्यामी परमात्मा श्री कृष्ण ने बालकों को आपस में नकली साँप के बारे में बातें करते सुना। यह नहीं जानते हुए कि नकली साँप के वेश में वास्तव में अघासुर था, एक दानव जो अजगर के रूप में प्रकट हुआ था, कृष्ण, जो इस बारे में जानते थे, अपने मित्रों को राक्षस के मुँह में प्रवेश करने से रोकना चाहते थे।   |   bhagavat अध्याय 10.12: अघासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 12: अघासुर का वध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.12.25 
इत्थं मिथोऽतथ्यमतज्ज्ञभाषितं
श्रुत्वा विचिन्त्येत्यमृषा मृषायते ।
रक्षो विदित्वाखिलभूतहृत्स्थित:
स्वानां निरोद्धुं भगवान् मनो दधे ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
हर व्यक्ति के हृदय में स्थित अन्तर्यामी परमात्मा श्री कृष्ण ने बालकों को आपस में नकली साँप के बारे में बातें करते सुना। यह नहीं जानते हुए कि नकली साँप के वेश में वास्तव में अघासुर था, एक दानव जो अजगर के रूप में प्रकट हुआ था, कृष्ण, जो इस बारे में जानते थे, अपने मित्रों को राक्षस के मुँह में प्रवेश करने से रोकना चाहते थे।
 
Lord Krishna, the omniscient Supreme Being present in every person's heart, heard the children talking to each other about the fake python. They did not know that it was actually Aghasura who had appeared in the form of a python. Knowing this, Krishna wanted to prevent his friends from entering the mouth of the demon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)