Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.12.16: इस प्रकार निर्णय लेने के बाद, दुष्ट अघासुर ने एक विशाल अजगर का रूप धारण किया, जो विशाल पहाड़ की तरह मोटा और आठ मील तक लंबा था। इस प्रकार अद्भुत अजगर का शरीर धारण करने के बाद उसने अपना मुँह पहाड़ की एक बड़ी गुफा के समान फैला दिया और रास्ते में लेट गया, कृष्ण और उनके संगी ग्वालबालों को निगलने की आशा से। | bhagavat अध्याय 10.12: अघासुर का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इति व्यवस्याजगरं बृहद् वपु:
स योजनायाममहाद्रिपीवरम् ।
धृत्वाद्भुतं व्यात्तगुहाननं तदा
पथि व्यशेत ग्रसनाशया खल: ॥ १६ ॥
अनुवाद
इस प्रकार निर्णय लेने के बाद, दुष्ट अघासुर ने एक विशाल अजगर का रूप धारण किया, जो विशाल पहाड़ की तरह मोटा और आठ मील तक लंबा था। इस प्रकार अद्भुत अजगर का शरीर धारण करने के बाद उसने अपना मुँह पहाड़ की एक बड़ी गुफा के समान फैला दिया और रास्ते में लेट गया, कृष्ण और उनके संगी ग्वालबालों को निगलने की आशा से।
Having decided this, the evil Aghasur assumed the form of a huge python, as thick as a huge mountain and as long as eight miles. Having thus assumed the body of a wonderful python, he opened his mouth as wide as a large mountain cave and lay down on the path hoping to swallow Krishna and his fellow cowherd boys.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥