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bhagavat 10.12.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: राजा जी, एक दिन कृष्ण जी ने जंगल में घूमते हुए नाश्ता करने का विचार किया। उन्होंने सुबह जल्दी उठकर सींग का बिगुल बजाया और इसकी मधुर ध्वनि से सभी ग्वालों और बछड़ों को जगाया। फिर कृष्ण और अन्य लड़के अपने-अपने बछड़ों के समूह को सामने रखकर व्रजभूमि से जंगल की ओर बढ़ चले।   |   bhagavat अध्याय 10.12: अघासुर का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 12: अघासुर का वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.12.1 
श्रीशुक उवाच
क्‍वचिद् वनाशाय मनो दधद्‌व्रजात्
प्रात: समुत्थाय वयस्यवत्सपान् ।
प्रबोधयञ्छृङ्गरवेण चारुणा
विनिर्गतो वत्सपुर:सरो हरि: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: राजा जी, एक दिन कृष्ण जी ने जंगल में घूमते हुए नाश्ता करने का विचार किया। उन्होंने सुबह जल्दी उठकर सींग का बिगुल बजाया और इसकी मधुर ध्वनि से सभी ग्वालों और बछड़ों को जगाया। फिर कृष्ण और अन्य लड़के अपने-अपने बछड़ों के समूह को सामने रखकर व्रजभूमि से जंगल की ओर बढ़ चले।
 
Shukdev Goswami said: O King, one day Krishna wanted to have breakfast while roaming in the forest. He woke up early in the morning and blew the trumpet of his horn and with its sweet sound woke up the cowherds and calves. Then Krishna and all the children, leading their groups of calves, left Vrajbhumi and headed towards the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)